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With playwright Asghar Wajahat

हम अपने शिक्षक के साथ हाल ही में पुणे में आयोजित एक हिंदी नाटक समारोह के लिए गए थे। यह प्रतिवर्ष ‘स्वतंत्र थिएटर ग्रुप, पुणे’ द्वारा आयोजित किया जाता है। हम दो दिन इस समारोह के लिए गए थे| हमने प्रत्येक दिन एक नाटक देखा। पहला नाटक था ‘जिसने लाहौर नहीं देख वह जनमा ही नही’| इसमें विभाजन के कारण भारत द्वारा देखी गई सबसे बड़ी त्रासदी की बात की गई थी। यह एक वृद्ध हिंदू महिला की कहानी बताई गई है, जो लाहौर में अपनी हवेली में रहने की जिद्द करती है| हालात उस समय और बदतर हो जाते हैं जब उस हवेली को एक मुस्लिम परिवार को आवंटित किया जाता है, जो लखनऊ से लाहौर आए हैं। हमें इस नाटक के नाटककार श्री असगर वजाहत से मिलने का सुअवसर मिला। दूसरे नाटक का नाम था ‘चौथी सिगरेट’ | इस नाटक में एक बहुत अच्छे लेखक की कहानी बताई गई, जिसके पास कार्य को छपवाने का कोई कौशल नहीं है। इसलिए वह एक अमीर व्यापारी को अपने नाम के साथ अपने कामों को बेचने के लिए सहमत हो जाता है। इस नाटक ने हमें एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया, जो पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार है।

महिका, प्रणव और आदित्य – डी पी १ हिंदी कक्षा

Translated in English

We along with our teacher went for a Hindi drama festival held in Pune recently. It is held annually by the Swatantra Theatre Group, Pune.  We saw one drama on each of the two days that we went.   The first drama was ‘Jisne Lahore Nahi Dekha Wah Janma Hi Nahi’ It spoke about the worst tragedy seen by India due to the partition. It told the story of an old Hindu woman who chooses to stay in her mansion in Lahore. Things take a turn for the worse when that mansion is allocated to a Muslim family who has migrated from Lucknow to Lahore. We got the opportunity to meet the playwright, Mr Asghar Wajahat. The second drama told the story of a very good author who has no marketing skill. So he agrees to sell his works with his name to a rich businessman.  It made us think about the perils of a middleclass person who is ready to do anything for money.

Mahika,Pranav and Aditya

DP 1 Hindi class

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